आज से शुरू है होलियष्टिक, जानिए क्या ना करें

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तो आ गए आप, कैसे हो?

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दोस्तो होली बिल्कुल पास में ही है और होलिका अष्टक आज से शुरू हो रहे है। होलिका दहन इस साल 21 मार्च को है और होली से 8 दिन पहले होलाष्‍टक लग जाते हैं। होलाष्‍टक लगते ही हिंदू धर्म में सभी शुभ कार्य वर्जित माने जाते जाता है, क्योंकि होलिका अष्टक के समय को अशुभ समय माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार फाल्गुन शुक्लपक्ष अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। इस बार होलाष्‍टक 14 March यानी आज से लग रहे हैं। आज से लेकर 21 मार्च तक होलाष्‍टक रहेंगे और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाएगा। इस साल होलाष्टक के साथ मीन संक्रांति भी है, इसलिए इस दिन से खरमास भी लग रहा है। अब आज से (होलिका अष्टक) से होलिका दहन के लिए लकड़ियां इक्खटी की जाने लगेगी।

कब से मन जाएगा खरमास:-

दोस्तो खरमास 15 March से है, पंचांग की गणना के अनुसार 15 मार्च की सूर्यदय से पहले सूर्य मीन राशि में आ रहे हैं इसलिए ज्योतिषीय के अनुसार यह संक्रांति 14 March की होगी लेकिन इसका पुण्यकाल 15 March को ही माना जाएगा और इसीदिन से खरमास की गिनती शुरू होगी। मीन राशि में सूर्य 14 April तक रहेगा। खरमास शुरू होने की वजह से इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, विवाह, मुंडन या फिर गृह प्रवेश जैसा शुभ संस्‍कार नहीं होंगे। तो भैया अगर रह गए अभी कवारे तो अब होली के बाद ही होंगे अब वारे न्यारे।😂

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क्यों होते हैं होलिकष्टक अशुभ:-

दोस्तो पौराणिक मान्‍यताओ के अनुसार होली से 8 दिन पूर्व अर्थात फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ जाता है। इस कारण कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। होलाष्टक को लेकर पौराणिक मान्‍यता है कि दैत्य राज हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी को भक्त प्रह्लाद को बंदी बना लिया था और यातनाएं दी थी। होलिका ने भी प्रह्लाद को जलाने की तैयारी इस दिन से शुरू कर दी थी और खुद होलिका दहन के दिन भस्म हो गई थी जिसके बाद रंगोत्सव मनाया गया था। रंगोउत्सव मानने के शुरुवात वही से हुई है।
एक ओर पौराडिक कथा इससे जुड़ी है:-

एक कथा ये भी है कि भगवान शिव ने होलाष्टक के दिन कामदेव को भस्म कर दिया था। जिससे प्रकृति में शोक की लहर फैल गई थी और लोगों ने शुभ कार्य करना बंद कर दिया था। होली के दिन भगवान शिव से कामदेव के वापस जीवित होने का वरदान मिल जाने से बाद प्रकृति आनंदित हो गई। इसलिए होलाष्टक से होलिका दहन के बीच का समय शुभ नहीं माना जाता है ओर इस बीच कोई शुभ काम भी वर्जित होता है।
होलिकष्टक खत्म होती है और शुरू होता है होलिकष्टक से लेकर रंगोउत्सव तक:-

हालांकि होली की तैयारियां होलिकष्टक से शुरू हो जाती है। लोगो के घर तरह तरह के पकवान जैसे गुजिया बनते है। मथुरा के हर घरों में करीब 10 दिन पहले से होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। घरों में तरह-तरह के पकवान-मिष्ठान बनाए जाते हैं। वृंदावन में रंगभरनी एकादशी के साथ ही होली प्रारंभ हो जाती है। एकादशी के दूसरे दिन से ही कृष्ण व राधा से जुड़े सभी मंदिरों में होली का आयोजन शुरू हो जाता है और लट्ठमार और फूलों की होली खेली जाती है। मथुरा और बरसाने की होली सारी दुनिया मे मशहूर है, क्योंकि ये राधा कृष्ण से जुड़ा पर्व भी है और ये जगह उनके जन्म और उनके जीवन काल से जुड़े है।
वृंदावन की होली होती है कुछ खास:-

दोस्तो होली की असली महक व्रन्दावन में मिलती है। अगर अपने यहां की होली नही देखी तो किसी होली पर यहाँ जाइएगा ज़रूर क्योंकि होली का त्योहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा है। बसंत में एक-दूसरे पर रंग डालना श्रीकृष्ण लीला का ही अंग माना गया है। मथुरा-वृंदावन की होली राधा-कृष्ण के प्रेम रंग में डूबी होती है। होली पर होली जलाई जाती है अहंकार की, अहं की, वैर-द्वेष की, ईर्ष्या की, संशय की और प्राप्त किया जाता है विशुद्ध प्रेम। यहां की होली में आप एक आध्यात्मिकता महसूस करेंगे।

किस जगह पर होता है होलिका दहन

फाल्‍गुन शुक्‍ल अष्‍टमी से ही होलिका दहन के लिए स्‍थान का चयन कर लिया जाता है। पूर्णिमा के दिन सांयकाल के शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। साथ ही यह भी जाना जाता है कि अगला साल कैसा रहेगा। ओर फिर उस मुख्य होलिका से आग लेकर घरों में बनी छोटी होलिका जलाई जाती है।

तो दोस्तो बस आज के लिए इतना ही खूब होली खेलना ओर रंग ना छुटे तो हमारी वेबसाइट से रंग छुटाने के उपाय भी पढ़ लेना।
बोलो जय माता दी।😀

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