New Zealand PM: Dozens killed in ‘terrorist’ attack on mosques

0
167

तो आ गए आप,कैसे हो?

 

दोस्तो आज बात एक बहुत दुखद घटना की करेगे New Zealand के Christchurch में दो मस्जिदों में एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। उस समय वहाँ जुम्मे की नमाज़ हो रही थी। इस घटना में कम से कम 49 लोग मारे गए और 40 से अधिक घायल हो गए।

शुक्रवार के हमले में 2 मस्जिदों को निशाना बनाया गया, यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी सामूहिक गोलीबारी की घटना थी, Central Christchurch में मस्जिद Al Noor और दूसरी मस्ज़िद Linwood में है। मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

एक 28 वर्षीय Australian व्यक्ति, जिसकी पुलिस ने पहचान नहीं की, पर इस हत्या का आरोप लगाया गया। उसे शनिवार को अदालत में पेश किया गया।

हमले की वारदात को देखते हुए दो अन्य पुरुषों और एक महिला को भी गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से दो अभी भी हिरासत में हैं।

पुलिस ने कहा कि दो IEDs (Improvised Explosive Devices) एक कार में पाए गए जो कि वहाँ की सेना द्वारा बेअसर कर दिए गए।
अधिकारियों ने मुसलमानों को “New Zealand में कहीं भी” मस्जिदों का दौरा न करने की चेतावनी दी है।

New Zealand के Prime Minister Jacinda Ardern ने कहा कि मस्जिदों पर हमला एक Well-Planned “Terrorist Attack” लगता है।

“यह New Zealand के सबसे काले दिनों में से एक होगा,” एक Ashen-Faced Ardern ने यह बयान Press को दिया।
Sam Clarke जो कि TVNZ के एक Reporter है उन्होंने ने Masjid Al Noor के अंदर इस हमले को लेकर कई लोगों से बात की। लोगो ने बताया कि एक आदमी एक Automatic Weapon लेकर घुस गया और गोलीबारी शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि”एक बंदूकधारी अंदर आया जिसके पास एक मशीनगन ओर एक हेलमेट था और उसने काले कपड़े पहने हुए थे। वो मस्जिद के पीछे की ओर से अंदर आ गया और वहां नमाज़ पढ़ रहे लोगों में गोली बरसानी शुरू कर दी,” ।

‘An Extremist, Right-Wing Terrorist’

Australian Prime Minister Scott Morrison ने पुष्टि की कि हत्या के आरोप में एक संदिग्ध Australian Citizen था और उसे “एक Extremist, Right-Wing, Violent Terrorist”. बताया।

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा अधिकारी देश और हमले के बीच किसी भी Link की जांच कर रहे थे, लेकिन उन्होंने संदिग्ध बंदूकधारी के बारे में अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।
28 वर्षीय संदिग्ध ने शूटिंग से पहले Tweeter पर एक नस्लवादी घोषणापत्र प्रकाशित किया, फिर फेसबुक पर अपने हमले का Livestream किया।

हमले के बाद Online Footage प्रसारित हुआ, हालांकि अब इसे हटाने के लिए काम किया गया। पुलिस ने लोगों से Footage Share ना करने के लिए कहा है, इसके अलावा अधिकारियों ने Web Users को भी चेतावनी दी कि वे इस तरह की “आपत्तिजनक सामग्री” को Share करने के लिए 10 साल तक की जेल की सजा काट सकते हैं।

Len Peneha, एक Witness, ने कहा कि उसने मस्जिद Al Noor मस्ज़िद में काले कपड़े पहने एक आदमी को देखा और फिर दर्जनों Shots सुनाई दिए, जब तक वो कुछ समझ पाता उसने लोगों को दहशत में पूजा स्थल से भागते हुए देखा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने Emergency Services के आने से पहले उस Gunman को भागते हुए भी देखा।

Peneha, जो की मस्जिद के बगल में ही रहते है, उन्होंने बताया कि जब वह मदद करने के लिए इमारत में गए तो उन्होंने देखा कि “सब तरफ मृत लोग थे”।

मस्जिद में मौज़ूद एक व्यक्ति ने कहा कि वह गोली चलने के दौरान एक बेंच के नीचे छिप गया था। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे थे। उसने कहा कि लगभग 50 लोग इमारत के अंदर थे।

TVNZ के Clarke ने कहा कि कुछ उपासक खिड़कियों और दरवाजों के माध्यम से भागने में सफल रहे लेकिन “कई लोग मारे गए, उनमे से कुछ लगभग 16 वर्ष की आयु के भी थे”।

उन्होंने बताया कि लगभग 10 से 15 लोग मस्जिद के बाहर दिखे, जिनमे से “कुछ जीवित थे, तो कुछ मृत”।
एक गवाह फरीद अहमद ने अल जज़ीरा को बताया कि वह मस्जिद के पीछे था और उसने लगभग सात मिनट तक गोली चलने की आवाज़ सुनी।

“मैंने अपने आप को पीछे की तरफ छुपा लिया जहाँ मेरी कार खड़ी थी और मैं कार के पीछे था। वहाँ से मैं एक के बाद एक लगातार गोलियां चलने की आवाज़ सुन रहा था।
“लगभग 10 मिनट के बाद, मुझे लगा कि Shooter निकल गया है। मैंने मस्जिद के अंदर जाने की कोशिश की मैं उस वक्त बहुत असहज हो गया था। मैंने Main कमरे में दायीं ओर 20 से अधिक लोगों को देखा, जिनमें से कुछ मृत थे, कुछ चीख रहे थे। ।
“मैंने फर्श पर सैकड़ों गोलियों को पड़ा देखा। मै
International Muslim association for New Zealand के ताहिर नवाज़ ने कहा कि उन्होंने मस्जिदों में गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है।
उनका कहना है कि “पूरा समुदाय स्तब्ध है। उन्होंने कभी भी इस देश मे जो कि इतना शांतिपूर्ण है।यहाँ पर ऐसा होने की उम्मीद किसी ने नहीं की होगी। उस हमले के परिणामस्वरूप, हम मस्जिद में अपनी गतिविधियों को प्रतिबंधित कर रहे हैं और हम सुरक्षा को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
Anger towards Muslims through media’

2013 की जनगणना के अनुसार, न्यूजीलैंड की आबादी में मुसलमानों की संख्या केवल 1% है।

मुस्लिमों का Media View समुदाय के खिलाफ गुस्से को भड़का रहा है, 2017 के एक Academic Research के अनुसार जिसमें 16,000 न्यूजीलैंडियों का सर्वेक्षण किया गया था।

John Shaver, जो कि the University of Otago, से है उन्होंने बताया कि Al Jazeera, Dunedin. “Highly Educated और Leftist-Oriented लोग आम तौर पर न केवल मुसलमानों बल्कि सामान्य रूप से प्रवासी आबादी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।”
अध्ययन में पाया गया कि मीडिया के माध्यम से मुसलमानों के प्रति गुस्सा पैदा किया जाता है। जितना अधिक वे समाचार देखते थे, उतने ही पूर्वाग्रही होते गए। ”
Shaver ने कहा कि उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि न्यूजीलैंड एक बहु-सांस्कृतिक समाज है जो सभी समूहों को स्वीकार कर रहा है। “केवल एक मुट्ठी भर घटनाएं हुई हैं जिनमें मुसलमानों को परेशान किया गया था या उनकी संपत्तियों के साथ बर्बरता की गई थी,”
उन्होंने कहा, “यहां स्थिति वैसी नहीं हैं जैसी ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका या Weatern देशो में हैं।
उन्होंने कहा कि New Zealand Media के देश में मुस्लिम आबादी के बहुत कम Coverage है, जो बहुत ही Specific है और 100 साल से अधिक पुराना इतिहास है।
“घरेलू मुस्लिम आबादी पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, मीडिया हिंसा पर ध्यान केंद्रित करता है और Weatern Media Lens से समुदाय को देखता है।
अल जज़ीरा के थॉमस ने कहा, “यह वास्तव में दुनिया के एक शांत हिस्से में एक शांत देश है और यह वास्तव में देश को इसकी नींव पर ले जाएगा।”

दोस्तो आज के लिए इतना ही, आप सभी ओर मैं भी मिलकर उन लोगो की आत्मा की शांति की प्राथना करेगे जो इस दुर्घटना के शिकार हुए है।

Leave a Reply