इस तरह से पूजा करने पर गढ़पति हो जायेगे बेहद खुश।

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तो आ गए आप, कैसे है आप?
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गणपति बप्पा मोरेया। सबसे पहले भाईयों गणपति के आते की आप सबको बहुत – बहुत बधाई हो। बप्पा आप की हर अच्छी मुराद पूरी करे क्योकि बुरी मुरादे पूरी करने में तो आप सब है की expert. दोस्तों हिन्दुओ में कहते है तैंतीस करोड़ देवी- देवता है और सबका नाम याद रखना और पूजा करना तो कतई असंभव है और कुछ तो ऐसे भी है जो भगवान के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते। अब इनमे सही कौन और गलत कौन यह तो ऊपर वाला ही जाने , मुझे तो बस एक बात पता है भाइयों की मूर्तियों या किरदार झूठे – सच्चे हो सकते है पर गुणों पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। किसीको मानना या ना मानना यह आपकी अपनी choice हो सकती है पर हम इंसानो की तरह भगवान भी अपने तरह के अलग गुणों के मालिक हुआ करते है , मूर्ति की पूजा बेशक न करो पर उनके गुणों और अच्छी सोच को जरूर अपना सकते है। और फिर गणपति जी तो है ही सबसे अनोखे , सबसे प्यारे जो अपनी माँ की बात मानाने के लिए शिवजी तक से भिड़ गए थे। गणपति जी का सबसे अच्छा गुण है उन्ही सोच , हम अक्सर यही मानते है की भगवान है तो perfect होंगे। पर imperfection को अपनी ताक़त बनाने वाले तो बस बप्पा ही है , उन्होंने सबसे पहले उदाहरण दिया की इंसान शरीर से नहीं सोच से अच्छा या बुरा बनता है। शरीर तो मात्र बाहरी दिखावा है। इसीलिए मेरे प्यारो – राजदुलारों किसी की बाहरी सुंदरता से impress होना छोड़ दो। मरना ही है तो दिल से दिल पर मरो।आज मैं इस बार की गणेश चतुर्थी मानाने के कुछ अनोखे तरीके ले कर आया हूँ , जिससे गणपति बप्पा ही नहीं बल्कि हमारा Environment भी खुश होगा। आज कल दोस्तों हर तैयार में श्रद्धा से ज़्यादा दिखावा आ गया है। इसलिए हम यह भूलते ही जा रहे है की हम इनको मानते की क्यों है। बस लगे है सब से सब हुल्लड़बाजी में , थोड़ा दारु चढाई , थोड़ा सुट्टा , दो चार गालियाँ दी और एक आधी लड़की को परेशन किया , थोड़ी कमर मटका ली तो हो गया त्यौहार पूरा। पर सही तरीका इससे बिलकुल अलग है।

1 . सबसे पहले शुरआत होती है उस मूर्ति की जिससे हम पूजने वाले है , दोस्तों फ़र्क़ है पड़ता की आपकी मूर्ति सोने की है या चाँदी की या मिट्टी के एक ढ़ेर , फ़र्क़ पड़ता है आपकी भावना से। तो क्यों ना इस बार eco friendly बप्पा लाये।

2 . दोस्तों त्योहारों है असली मतलब सबका साथ मिलकर ख़ुशी मनाना है , तो क्यों हम आज हर घर में एक मंदिर बना लेते है , हर गली में एक पंडाल। अब बप्पा से बारे में ज़रा सोचिये कितनी दिक्कत होगी उनके है पंडाल में जाने में , और वो भी मूषक पर बैठ कर तो क्यों ना हर घर मंदिर या हर गली पंडाल की जगह एक साँझा पंडाल बनाया जाये , जिसमे त्यौहार मानाने का असली मज़ा भी आये। इससे आप भी खुश और बप्पा भी।

3 . किसी भी त्यौहार को मानना सिर्फ हुड़दंग करना नहीं होता, बल्कि यह मौका देता है अपने अंदर के artist को बहार लाने का , तो क्यों न इस बार chinesse lights से बप्पा का स्वागत करने की बजाय कुछ original , कुछ creative हो जाए।

4 . हम हर बार बप्पा को विदा किसी नदी या समुद में विसर्जित करके करते है , इससे बप्पा तो चले जाते है पर पीछे छोड़ जाते है गन्दी नदियाँ  और समुद को सालो साल हमारे साथ ही रहेंगे , तो क्यों ना इस बार बप्पा को घर के किसी तब में ही विसर्जित किया जाए इससे कुछ नहीं तो हमारी नदियाँ साफ़ रहेंगी। इसीलिए इस बार बप्पा water pollution की जगह बस खुशियाँ लाएंगे।

5 . आखिरी और सबसे अहम , दोस्तों किसी भी त्यौहार को मांनने का बस एक ही मकसद होता है की हम उस की अच्छे गुणों को अपनाये , तो इस बार सिर्फ बप्पा को नहीं अपनी गन्दी आदतों को भी विसर्जित करना। वरना बप्पा खुश होने की बजाय दुखी हो जायेगे।

बोलो जय बप्पा की।☺️

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