इस कदर बढ़ गया है Traffic Police का ख़ौफ।

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तो आ गए आप, कैसे हो?

 

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दोस्तों अगर मैं आपसे पूछूँ की भाइयो एक ऐसी चीज़ बताओ जो आपको जान से ज़्यादा प्यारी है। तो मुझे पक्का यकीन है आपके दिमाग में किसी मंद – मंद मुस्काती लड़की नहीं बल्कि बूम – बूम करती अपनी फटफटिया की तस्वीर आएगी। और इसमें आपका बिल्कुल भी कसूर नहीं , क्योकि हम लौंडो की दो ही तो कमजोरी है जो कि दारु और सुट्टे की लात से भी ज़्यादा भयानक है। और वो है क्रिकेट मैच का बुख़ार और अपनी फटफटिया को बिना ज़माने या ट्रैफिक की परवाह किये हवा से बाते करना। और जो हमे सबसे ज़्यादा बेकार लगती है वो है यह ट्रैफिक के बेकार से नियम और यह महाबेक़ार हेलमेट , जो अक्सर हमारी घनी लहराती जुल्फों को छुपा देता है। कौन कहता है की सिर्फ लड़कियों को अपने बाल पसंद होते है , अरे जालिम कभी बाल सेट करके , Gel लगाकर निकलते हुए लड़के से भी पूछो की कैसा लगता है, जब उसकी तमाम तैयारी पर यह हेलमेट नाम का राक्षस पानी फेर देता है। कसम से जी तो ऐसा करता है की इससे पटक – पटक कर  लथेड़ो , पर क्या करे हमारा दर्द न ससुरा कोई जनता है और ना जाने की कोशिश करता है। बस सबसे ने कतई बच्चन साहब की बातो को  सच मान लिया की मर्द को दर्द नहीं होता है। मैं कहता हूँ होता है , मर्द को भी दर्द होता है। जब उसे ढाई किलो का हेलमेट पहनकर हवा से बाते करने वाली Bike को साईकिल की तरह चलना पड़ता है। तो इस दिल में भी कुछ- कुछ नहीं बहुत कुछ होता है।

आजकल दिल्ली की सड़को पर किसी आतंकवादी से ज़्यादा खौफ़ दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस का छाया हुआ है। क्योकि हाल में ही में Motor Vehicle Act लागू होने से  दिल्ली में लगने वाले चलान दर पर भारी बढ़ौतरी आयी है। इस नए नियम के अनुसार ट्रैफिक चलानो ले 5 से 10 दूना तक वृद्धि आयी है। यानी जो fine पहले सिर्फ 100 रुपये था वो बढ़कर 1000 रुपये हो गया है। इससे भी बड़ी बात की यह चलान ट्रैफिक पुलिस नहीं बल्कि सीधा कोर्ट से कटेगा , तो जो  हमे दुसरो का ध्यान रखने और उनके थोड़ा खर्चा पानी देने की गन्दी आदत लगी हुई थी।😂 उस पर रोक लग जाएगी। दरसल दिल्ली के लोगो की परेशानी ही यही है की वो जब घर से बाहर निकलते है तो खुद को राजा , रोड पर चलने वालो को गरीब जनता और सड़क को अपने बाप का माल समझते है। जिसपर जब चाहे कैसे भी कोई नियम तोड़ देंगे और किसी सफ़ेद वर्दी में खड़े पुलिस वाले को 100 या 500 का कड़क नोट दिखा देंगे और उनका काम बन जायेगा। फिर इस बात से क्या मतलब की दूसरी सवारी मरे या जिये ? पर अब आपको इस बात का ध्यान रखना होगा। नहीं तो गाल गर्म हो ना हो यह जो जेब गर्म है ना यह बहुत ठंडी हो जाएगी Fine भर – भर कर।   ट्रैफिक पुलिस के इन नियमो से दिल्ली टैफिक चलान में पिछले हफ्ते से लगभग 70 प्रतिशत कमी आयी है। तो अगली बार अगर सड़क पर कोई कान पकडे या हाथ जोड़े खड़ा हो तो समझ लेना की ” ठाकुर तो गियो।’

हम दिल्ली पुलिस की इस नयी पहल का स्वागत करते है। और दोस्तों मुझे उम्मीद है की अगली बार अगर आप घर से बाहर  निकलेंगे तो दूसरी सवारियों को भी इंसान समझेंगे। क्योकि घर पहुंचने की जल्दी सबको है , पर घर पहुंचने से ज़्यादा जरुरी घर सही सलामत पहुंचने में है। तो जैसा किसी महान पुरुष ने कहा है की दुर्घटना से देर भली। तो ज़रा इस बात पर गौर जरूर करना भाइयो , क्यूकि बाल चाहे खराब हो जाये पर आपकी या किसी दूसरे की ज़िन्दगी नहीं ख़राब होनी चाहिए।
बोलो जय माता दी।

मैं दिल्ली पुलिस की इस नयी पहल की सराहना करता हूँ | उम्मीद है की अगली बार घर से

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