इस रिवाज़ की वजह से जा रही है कि लड़कियों की जान।

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तो आ गए आप , कैसे है?
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दोस्तों आज जो मैं आपसे बात करने वाला हूँ , यूँ तो वो है बहुत आम सी बात। पर इस आम – सी बात ने ही ना जाने कितनी ख़ास ज़िन्दगियों को बर्बाद कर दिया है। वो ज़रा – सी बात है Generation Gap. मुझे यकीन है की ये शब्द तो आप के लिए नया बिलकुल नहीं है। और हम में से ना जाने कितने लोग इस परेशानी से रोज जूझते है। मैं भी उन भुगत भोगियो में से एक हूँ।😜 ये परेशानी है जिसमे सही कौन और गलत कौन का अंतर कर पाना नामुमकिन है। कहते के लिए तो यह महज सोच का अंतर है पर यह अंतर अक्सर आपकी ज़िंदगी नर्क बना देता है।😂

कभी – कभी तो आपकी ज़िन्दगी ही ख़त्म  कर देता है। अपने अक्सर अपने माँ – बाप को यह कहते सुना होगा की ” यह हमारी बात समझता नहीं  या हमने तुझे पैदा किया हैं , तू हमसे ज़्यादा जानती है क्या?” चाहे अपना पसंदीदा Subject हो या अपनी पसंद की शादी ये Gap हमेशा अज़गर की तरह मुँह फाडे हमें निगलने के लिए तैयार बैठा रहता है। माँ – बाप यह सोचते है की वो हमरी भलाई और ख़ुशी के लिए ये कर रहे है , पर उन्हें कौन बताये की अब भलाई और ख़ुशी देने के तरीके पुराने नहीं रहे। ऐसे ही एक तरीका सदियों से चला आ रहा है लड़की को ख़ुशी देने का और वो है दहेज़। माँ – बाप को लगता है की चाहे जितना पैसा देना पड़े , हम दे देंगे बस हमारी बिटिया खुश रहे। पर वो भूल जाते है की खुशिया बाजार में नहीं बिकती, उससे खरीदा नहीं जा सकता। वो लोग जो अपने लड़के को दो – दो टके के लिए बेच देते है , वो तो हरगिज आपकी बेटी को खुशिया नहीं दे सकते और बस उन्ही यही सोच और Generation Gap अक्सर उनकी लड़कियों को मौत के दरवाजे पर खड़ा कर देता है।
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ऐसी एक घटना सामने आई तेलंगाना के हैदराबाद  में दो अलग – अलग महिलाओ ने दहेज़ की बढ़ती मांग से तंग आ कर खुद को ज़िंदा जला दिया। इनमे से एक महिला 31 वर्ष की थी जो एक सरकारी कर्मचारी थी इनकी शादी पिछली साल जून में हुए थी। शादी के वक़्त इनके माँ – बाप ने लड़के वालो को 18 लाख रुपये दे कर अपनी बेटी की खुशियाँ और सुनेहरा भविष्य खरीदा था , पर उन्हें क्या पता था की इससे वो दरसल में उसकी मौत खरीद रहे है। क्योकि दहेज़ की लालच एक ऐसा कुआँ है जिसे जितना पैसे से भरो वो उतना प्यासा हो जाता है और अंत में लड़किया थक – हार कर खुदख़ुशी कर लेती है। अगली बार दोस्तों अगर आप किसी को दहेज़ देते या लेते देखे तो यह जरूर पूछना की क्या सच में खुशिया बिकाऊ है? और अगर हाँ तो उसकी कीमत इतनी सस्ती कैसे है? दजेह से आप अपनी बेटी के कल को बचाते नहीं बल्कि बेचते है। तो अपनी लड़की तो बेचते वक़्त एक बार सोचना की क्या जरुरी है उसे इतने सस्ते में बेच देना?

इन बातो से आमिर खान जी के शो सत्य मेव जयते का एक गाना याद आ गया।

“बाबुल प्यारे सजन सखारे
सुन ओ मेरी मैय्या
बोझ नहीं मैं किसी के सर का
ना मझदार में नैय्या
पतवार बनूँगी, लहरों से लडूंगी
अरे मुझे क्या बेचेगा रुपैय्या
हो अरे मुझे क्या बेचेगा रुपैया”

तो बोलो जय माता दी।🤗

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