जानिए क्यों रोता है भारत हर साल प्याज के आँसू ?

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तो आ गए आप , कैसे हो ?
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दोस्तों अगर आप भी मेरी तरह भुख्खड़ हो तो एक चीज़ जो आपको हर खाने के साथ चाहिए होती है , वो है प्याज। क्योंकि खाना चाहे कितना भी बेस्वाद क्यों ना हो प्याज़ है खाने की जान होती है। अब आप सोच रहे होंगे आपको देश दुनिया की बड़ी खबरे देने वाला ये टेक्टोनिक दोस्त आज अचानक से आलू – प्याज की बाते क्यों कर रहा है। सिर्फ मैं नहीं दोस्तों इसकी बात आज भारत की हर गृहणी  कर रही है। वो दिन गए जब हम सिर्फ इससे काटने वक़्त रोते थे , आज तो हाल ये है दोस्तों की इसका नाम सुनते ही कपकपी छूटती  है ? और छूटे भी क्यों ना इसके भाव जो इतने बढ़ गए है। क्या यही है अच्छे दिन ?  अरे भैया भारत में तो इंसान इससे सस्ते बिकते है। जितनी महंगी ये अदनी – सी प्याज़ बिक रही है। पर इसका कारण क्या है ? तो चलिए जानते है इससे आसमान छूते रेट का कारण। क्यों ये गरीब की थाली से ग़ायब हो कर , रहीसो की थाली की शान बन गई है।

दोस्तों हर साल भारत में त्योहारों का मौसम आते ही।  जो चीज़ सबसे पहले हमारी पकड़ से दूर भागती है, वो है प्याज़। इसका कारण क्या है ? क्या किसानों ने इससे अपना मुँह मोड़ लिया है  या बाज़ारों के बिचोलिये इसके साथ गड़बड़ी कर रहे है ? भारत चाहे तो चीन के बाद दूसरे नंबर का प्याज़ उत्पादक देश बन सकता है। पर उसके बाद भी भारत पीछे है। ऐसा नहीं है की इसकी खेती काम होती है , पर फिर भी हम हर साल इसके लिए तरसते है। अमेरिका प्याज़ की खेती के लिहाज़ से दुनिया के टॉप दस देशों में भी नहीं आता। फिर भी वो भारत से चार गुना प्याज़ पैदा करता है। और हम इसमें भी उससे पीछे रह गए। क्योंकि भारत में प्याज़ को भंडार की क्षमता सिर्फ 2 % है और इसी वजह से हर साल लगभग 40 % प्याज़ सड़ जाता है। और जो कमी बचती है उसे बिचोलिये पूरा कर देते है। अपना कमिशन खा कर। इसलिए जो प्याज किसानो से कूड़े के भाव खरीदी जाती है। वो हमारी रसोई में सोने के दाम पहुँचती है।

तो इसी बात पर हो जाये कुछ हांसेदार😅😆😄 :

“प्रेमी (प्रेमिका के पिता से) – अंकल, मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता हूं।
पिता- काम क्या करते हो?
प्रेमी- जी, खेती-बाड़ी।
पिता- इस जमाने में खेती-बाड़ी। भाग जा यहां से, ये शादी नहीं हो सकती…।
प्रेमी- अंकल…, मैं ‘प्याज’ की खेती करता हूं। > >
अंकल – बेटा , बारात लेकर कब आना चाहोगे ?”😅😆😄

दोस्तों अब कितना नीचे गिरेंगे ये लोग इंसान तो छोड़ो इन्होने आलू – प्याज जैसी मासूम सब्ज़ियों को भी नहीं छोड़ा। 😅😅 अब तो लगता है इस प्यारी और मासूम चीज़ की तस्वीर देखकर ही गुज़ारा करना पड़ेगा। जैसे उन हसीन लड़कियों की देखकर करनी पड़ती है , जिनका प्याज की तरह भाव बढ़ गया है। हम रहे वही गरीबुद्दीन।

जय माता दी।  जय हिन्द।

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