सुप्रीम कोर्ट ने ST / SC Act पर अपना पुराना फैसला एक बार फिर वापस लिया।

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तो आ गए आप , कैसे हो ?

दोस्तों पूरी दुनिया में भारत अपनी अनेकता में एकता के लिए मशहूर है , पर इस की असली सच्चाई क्या है ये किसी भारतीय से छुपी नहीं है। क्योकि हम जानते है की शायद पूरी दुनिया में भारत की एक ऐसा देश है जहाँ सबसे ज़्यादा भेद – भाव होता है। और वो भी किसी नीचले स्तर का नहीं। यहाँ तो आलम ये है की अगर कोई दूसरे धर्म का इंसान आपका पानी भी छू ले या भी आपके घर में क़दम रख ने तो उसे अशुद्ध मान लिया जाता है। इसलिए भारत में आज भी हज़ारो गांव है जहाँ आज भी पानी भरने के कुँए और नल ऊंची और नीची जाति के अलग – अलग है। जहां आज भी ऊंची जाती के बच्चो को डेस्क और नीची जात के बच्चे को जमीन पर बिठाया जाता है। यहाँ क़ाबलियत की पहचान  आपके टैलेंट को देखकर नहीं बल्कि आपकी जात को देखकर की जाती है। ऐसे देश में जहाँ आज भी नारी , छोटी जाती और दूसरे धर्म के लोगो को नीची निगाह से देखा जाता हो। उसकी तरक्की कैसे मुमकिन है ? और कैसे कहे हम सिर उठाकर और सीना चौड़ा करके मेरा भारत महान ?

दोस्तों भारत को आज़ाद हुए सत्तर साल से भी ज़्यादा हो गए है और उससे भी पुरानी जंग है , जात – पात की। पर बड़े अफ़सोस की बाद है की देश तो आज़ाद हुआ पर हमारे विचार नहीं। हम आज भी सदियों पुरानी ऊंच – नीच की ज़ंजीरो में क़ैद है। और आज़ादी के भी कोई असर नज़र नहीं आ रहे है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 2018 को अपने पुराने फैसले जिसमे ST / SC  को निचा देखने के लिए तुंरत गिरफ़्तारी पर लिया फैसला बदल दिया था। क्योकि जजों का मानना था की बहुत सारे निर्दोष लोग इसके तहत गिरफ्तार हो गए है। इस फैसले को बदलने के लिए एक याचिया जारी की गई। जिसपर आज तीन न्यायमूर्तियों के Bench ने एक बार फिर फैसला लिया। जिसमे न्यायाधिशो ने कहा की “भारत में अभी भी जात – पात और Untouchability  खत्म नहीं हुए है। और आज भी  हज़ारो लोगो को बराबरी का हक़ पाने के लिए रोज लड़ाई करने पड़ती है। इसलिए महज इस बात पर की कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है , इसे बदला नहीं जा सकता। और झूठ सामान्य जाति के लोग भी बोल सकते है। इसलिए इस Act में कोई ढील नहीं दी जाएगी और किसी भी जाति के आधार पर किये गए कमेंट या भेद – भाव पर तुरंत गिरफ़्तारी होगी ”

“क्या तू लेकर आया था और क्या लेकर तू जायेगा ,
एक इंसान के होने के अलावा , कौनसी अलग पहचान बनाएगा।
तू  भी उसका बंदा है और मेरा भी वही ईमान
तुझे  ऊंची जात – धर्म का फिर क्यों इतना अभिमान।
ये देह है मिट्टी पुतला , उसी  में मिल जाना इसका काम ,
अब बस तू चिल्लाना छोड़ दे , की मेरी जाति नीची  है और तेरी महान। ”

दोस्तों जात – पात एक ऐसी बीमारी है , जो सबसे पहले आप के अंदर की इंसानियत को मार देती है , फिर आपकी आत्मा को। और इन दोनों के बिना ज़िंदा रहना मानो किसी चलते – फिरते पुतले के समान है। तो अब फैसला आपको करना होगा की आप इंसान बनना चाहते है या पुतला

जय माता दी। जय हिन्द

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